प्रारब्ध क्या है?
हर इंसान कभी न कभी यह सवाल ज़रूर पूछता है — “मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?” यही सवाल हमें प्रारब्ध कर्म (Prarabdha Karma) के रहस्य की ओर ले जाता है। संस्कृत में “प्रारब्ध” का अर्थ है — जो आरंभ हो चुका है। अर्थात्, जो कर्म पहले किए जा चुके हैं और अब फल देने के लिए तैयार हैं — वही प्रारब्ध कहलाते हैं। यह हमारे जीवन की वे परिस्थितियाँ हैं जिन्हें हम इस जन्म में भोग रहे हैं — चाहे वह सुख हों या दुख।